الكتاب الأول: الطعام والشراب

قال تعالى: {يَاأَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا كُلُوا مِنْ طَيِّبَاتِ مَا رَزَقْنَاكُمْ *}. [البقرة:172] وقال تعالى: {يَاأَيُّهَا الرُّسُلُ كُلُوا مِنَ الطَّيِّبَاتِ وَاعْمَلُوا صَالِحًا *}. [المؤمنون:51]

2638 - (ق) عَنْ عُمَرَ بْنِ أَبِي سَلَمَة قَالَ: كُنْتُ غُلاَماً في حَجْرِ [1] رَسُولِ اللهِ صلّى الله عليه وسلّم، وَكانَتْ يَدِي تَطِيشُ [2] في الصَّحْفَةِ، فَقَالَ لِي رَسُولُ اللهِ صلّى الله عليه وسلّم: (يَا غُلامُ، سَمِّ الله، وَكُلْ بِيَمِيِنكَ، وَكُلْ مِمَّا يَلَيكَ) ، فَمَا زَالَتْ تِلْكَ طِعْمَتِي [3] بَعْدُ.

उमर बिन अबू सलमा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि मैं बच्चा था और अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की कफ़ालत (किसी कार्य, विषय या बात का लिया जाने वाला भार) में था। खाना खाते समय मेरा हाथ प्लेट के चारों तरफ घूमता था। मुझे इस तरह खाता देख अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने मुझसे कहाः "ऐ बच्चे, अल्लाह का नाम ले, अपने दाएँ हाथ से खा और अपने सामने से खा।" फिर उसके बाद मेरे खाने का यही तरीक़ा रहा।

2639 - (م) عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللهِ: أَنَّهُ سَمِعَ النَّبِيَّ صلّى الله عليه وسلّم يَقُولُ: (إِذَا دَخَلَ الرَّجُلُ بَيْتَهُ، فَذَكَرَ الله عِنْدَ دُخُولِهِ وَعِنْدَ طَعَامِهِ، قَالَ الشَّيْطَانُ: لاَ مَبِيتَ لَكُمْ وَلاَ عَشَاءَ. وَإِذَا دَخَلَ فَلَمْ يَذْكُرِ الله عِنْدَ دُخُولِهِ، قَالَ الشَّيْطَانُ: أَدْرَكُتُمُ الْمَبِيتَ. وَإِذَا لَمْ يَذْكُرِ الله عِنْدَ طَعَامِهِ، قَالَ: أَدْرَكْتُمُ الْمَبِيتَ وَالْعَشَاءَ) .

जाबिर बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अंहु) नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से वर्णन करते हुए कहते हैंः "जब आदमी अपने घर में प्रवेश करता है और प्रवेश करते समय तथा खाना खाते समय अल्लाह (तआला) का नाम लेता है, तो शैतान अपने साथियों से कहता हैः न तुम्हारे लिए रात बिताने का स्थान है और न रात का खाना। और जब वह घर में प्रवेश करता है तथा प्रवेश करते समय अल्लाह (तआला) का नाम नहीं लेता, तो शैतान कहता हैः तुमने रात बिताने का स्थान पा लिया और जब खाना खाते समय अल्लाह (तआला) का नाम नहीं लेता, तो कहता हैः तुमने रात बिताने की जगह तथा रात का खाना दोनों पा लिया।"

2643 - (خ) عَنْ أَبِي جُحَيْفَةَ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صلّى الله عليه وسلّم: (إِنِّي لاَ آكُلُ مُتَّكِئاً) .

अबू जुहैफा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि मैं नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास था कि आपने एक व्यक्ति से, जो आपके निकट था, फ़रमायाः "मैं टेक लगाकर नहीं खाता।"

2645 - (م) عَنْ كَعْبِ بْنِ مَالِكٍ قَالَ: كَانَ رَسُولُ اللهِ صلّى الله عليه وسلّم يَأْكُلُ بِثَلاَثِ أَصَابِعَ، وَيَلْعَقُ يَدَهُ قَبْلَ أَنْ يَمْسَحَهَا.

जाबिर बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अनहुमा) का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने (खाने के बाद) उँगलियों तथा प्लेट को चाट लेने का आदेश दिया है तथा फ़रमाया है: तुम नहीं जानते कि भोजन के किस अंश में बरकत है। एक रिवायत में है: जब तुममें से किसी का निवाला गिर जाए, तो उसे उठा ले तथा उसमें जो गंदगी लगी हो, उसे साफ़ करके उसे खा ले एवं शैतान के लिए न छोड़े, तथा उँगलियों को चाटने से पहले अपने हाथ को रूमाल से न पोंछे, क्योंकि वह नहीं जानता कि भोजन के किस अंश में बरकत है। तथा एक रिवायत में है: शैतान तुम्हारे हर काम के समय तुम्हारे पास उपस्थित रहता है, यहाँ तक कि तुम्हारे खाने के समय भी तुम्हारे पास होता है। अतः, जब तुममें से किसी का निवाला गिर जाए, तो उसमें जो गंदगी लगी हो, उसे साफ़ करके उसे खा ले और उसे शैतान के लिए न छोड़े।

2647 - (خ) عَنْ أَبِي أُمامَةَ: أَنَّ النَّبِيَّ صلّى الله عليه وسلّم كانَ إِذَا فَرَغَ مِنْ طَعَامِهِ ـ وَقالَ مَرَّةً: إِذَا رَفَعَ مائِدَتَهُ ـ، قالَ: (الحَمْدُ للهِ الَّذِي كَفَانَا وَأَرْوَانَا، غَيْرَ مَكْفِيٍّ [1] وَلاَ مَكْفُورٍ [2] ) . وَقالَ مَرَّةً: (الحَمْدُ لله رَبِّنَا، غَيْرَ مَكْفِيٍّ وَلاَ مُوَدَّعٍ [3] ، وَلاَ مُسْتَغْنًى، رَبُّنَا) .

अबू उमामा- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब दस्तरख़्वान उठाते तो कहतेः "الحَمْدُ للهِ حَمْدًا كَثِيرًا طَيِّبًا مُبَارَكًا فِيهِ، غَيْرَ مَكْفِيٍّ، وَلَا مُوَدَّعٍ، وَلَا مُسْتَغْنًى عَنْهُ رَبَّنَا" (अर्थात, सारी प्रशंसाएँ अल्लाह की हैं, बहुत ज़्यादा, स्वच्छ और बरकत वाली प्रशंसा, वह सबके लिए काफ़ी है, उसे छोड़ा नहीं जा सकता, और ना ही कोई तेरी प्रशंसा से निस्पृह हो सकता है)।

2648 - (م) عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صلّى الله عليه وسلّم: (إِنَّ اللهَ لَيْرَضَى عَنِ الْعَبْدِ أَنْ يَأْكُلَ الأَكْلَةَ، فَيَحْمَدَهُ عَلَيْهَا، أَوْ يَشْرَبَ الشَّرْبَةَ، فَيَحْمَدَهُ عَلَيْهَا) .

अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : "निश्चय अल्लाह बंदे की इस बात से खुश होता है कि बंदा कुछ खाए तो उसपर अल्लाह की प्रशंसा करे और कुछ पिए तो उसपर अल्लाह की प्रशंसा करे।"